ज़िन्दगी है, बस चल रही है।

ज़िन्दगी है, बस चल रही है।ज़िन्दगी हवा से
कभी धीरे ,
कभी जोरों से चल रही है
ज़िन्दगी है,
बस चल रही है।

ज़िन्दगी तूफान सी 
सुरुवात में शौन्धी--शौन्धी 
उम्र गुजरते उफान सी
हर तूफान सी
साम होते होते ढल रही है
ज़िन्दगी है, बस चल रही है।

रेत सी है  ,
हर बीती बाते बस्ती इसमे,
ठंड मे यादें ,गर्म कभी रखती
कभी अंगारों मैं शीतल जल सी होती
ज़िन्दगी रेत सी
बस पिसल रही है
ज़िन्दगी ही तो है,

बस चल रही है।

उन पेड़ो के पत्तो सी है 
ज़िंदगी,
अपना कार्य पूर्ण होने पर
साथ छोड़ गिर रही है ज़िन्दगी
चल रही है ज़िन्दगी

बस चल रही है ज़िन्दगी

Writer :-

Shiva rajak.
31 jan 2020
12.26 a.m

Comments

  1. प्राकृतिक कविता। बेहद खूबसूरत।ऐसी हीं कविताएं लोगों को प्रकृति के संग बांध के रख सकतीं हैं।धन्यवाद भैया। कविता और कवि के इस संबंध को कभी नहीं तोडना।

    आपकी तरह एक कविता प्रेमी
    खिलेश्वर

    ReplyDelete
    Replies
    1. Thanks for such a compliment bro!!

      I will try to write much better further ☺️☺️

      Delete
  2. Lage raho, you can must do best....

    ReplyDelete

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