अनाथ है हैम दोनो ही।
एक जैसे ही कमिया खलती हैम दोनो को,
पर सिख चुके अब मिलकर जीना,
अब बचा ही क्या पाने को।
ढूंढी मैन मेरी मंज़िले तुझमे ,
तुझको ही संसार माना,
सौप रहा हूँ अब तेरे हाथो सब कुछ,
तुझमे ही अब संसार बनाना।
एक पिता सा बोझ उठाते देखा है मैने तुझको,
एक माँ सा तू मेरा ध्यान रखती है,
इतना हौसला कैसे है तुझमे,
इतना सब कुछ तू अकेले कैसे करती पाती है।
तेरी नज़रों का काजल बन के रहूंगा,
तुझसे ही सुरु, तुझे पे ही खत्म होऊंगा,
वादे नही करता मैं,
की अटल हमारा बंधन साथ जन्मो तक रहेगा,
वो चाहे कुछ पल ही हो,बस तुझ संग ही रहेगा।
अनाथ है हम दोनो,
पर अब साथ है हम दोनो
एक कहानी है हमारी, जो बची सुनानी है,
कुछ पन्नो में इतिहाश है हम दोनो।
Writer
Shiva rajak.
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