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मैं ये समझ नही पा रहा हूँ!

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(Pre scriptum: - Exclamation mark in most of the sentences means either the line ends there  Or the poet is trying to explain the deepness of the respective statement !). The poem > मैं ये समझ नही पा रहा हूँ! मैं ये समझ नही पा रहा हूँ ! आखिर मैं क्या चाह रहा हूँ  किस दिशा किस मोड़ से किस रास्ते मैं कहाँ जा रहा हूँ! कौन सी राहें चलनी है , किस मुकाम पे जा पहोचाना है , क्या हासिल करना और  किश हद्द तक जेबे भरनी है , क्या है सही और क्या गलत , क्या ये मेरे वास्तव का सच है , या कोई अत्तित की परछाई है । या ये कर्मा है जो घूम के वापस आ रहा है! बस यही सब है जो मैं समझ नही पा रहा हूँ , की किस दिशा,  कौन से मोड़ से कहाँ  मैं कहाँ जा रहा हूँ। ये कौन से रंगमंच मे हूँ मैं! ये कैसे किरदार को मैं निभा रहा हूँ, जहाँ मैं ही नायक हूँ, और मैं ही खुद को मारना चाह रहा हूँ ! मैं ये समझ नही पा रहा हूँ! की किस दिशा मैं कहाँ जा रहा हूँ। पढ़ाई लिखाई एक तरफ एक तरफ  म...