दोस्ती से आगे बढ़कर।
दोस्ती से आगे बढ़कर। दीवानगी है बहोत मुझमें तेरे लिए तू भी कम पागल नही मेरे लिए, पर क्यों ठहर रहा ये सब बस दोस्ती तक, रोक रहा है दिलो को मिलने से दूर तक चल फिर इत्तेफ़ाक़ से रूबरू होते हैं साथ आगे बढ़ते है दोस्ती से आगे बढ़कर कुछ करते हैं। चलो ठीक है ये सब, पर फिर भी, एक बार फिर से मिलकर देखते है दुनिया, दोस्ती से कुछ कदम आगे बढ़कर, एक दूसरे को जरा ज्यादा अपना कर मिलकर दोस्ती से आगे बढ़कर। चाय तो कई बार पी है एक साथ, रात भर सहर भी साथ मिलकर घूमे है सारी सर्राते भी मिलकर की है और काम भी आये है एक दूसरे के बुरे वक़्त पर, पर दोस्ती तक, दोस्ती से एक कदम भी नही आगे बढ़कर। मै ये मानता हूँ, सच्चा दोस्त जैसा कोई नही इस दुनिया मे खुशियों से लेकर गम तक का वो साथी होता हैं कदम दर कदम साथ चलता है पर दोस्ती तक , उससे एक कदम भी नही आगे बढ़ कर। पर तुम भी ये जानती हो, के फिर भी खलती है कमी अंदर ही अंदर जो छुपा के रखता है हर दोस्त दुनिया से मन के भावनाओ का समंदर। वो कमी जो सायद तुम्हे भी सता रही पर तुम ...