तुम्हारे ख्वाब है कहीं ( एक कविता)_कवी -shiva rajak.

तुम्हारे ख्वाब है कहीं।

 कोई ख्वाब बड़ा नही
चलना पड़ता है बस ।
धीरज रख कर समय की
जलती रेत मे जलना पड़ता है बस।

 कोई ख्वाब छोटा नही ,
जरूरतो की बस ये एक चाल है।
भूक लगती है तो पेट भरना एक ख्वाब होता है,
इस छोटी सी दुनिया मे, 
एक ख्वाब मोह माया का जाल है बस।

कोई ख्वाब किसी के जीने का आशियाना है
कोई ख्वाब किसी की जिंदगानी है, 
हर रोज़ नए ख्वाब लेकर चलती ये कैसी ज़िन्दगी है।

 एक ख्वाब किसी के लिए सब कुछ है,
 किसी और लिए बस एक आराम का फ़साना है।
ये कैसा अजीब समय आगया,
ये ख्वाबो को पूरा करने का ज़माना है।

 परिंदो जैसे पर है तुम्हारे पास भी,
बून लो ख्वाब तुम भी कई
जो भी दिक्कते है ,तुम्हारे अंदर है बस,
दुनिया के बारे मे तो पूछो मत,
यहाँ कुछ भी नही गलत ,कुछ भी नही सही।

 
ढूंढो तुम भी, 
तुम्हारे ख्वाब है कहिं। 

`writer
`shiva rajak

Oct 3 2020
12.09 pm


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