तुमसे तुम तक।

वक़्त के साथ कम हो जाए 
ऐसा मेरा इश्क़ नही है

जो छोड़ दू साथ तेरा बेवक़्त
ये फितरत नही है

रूठ जाना कितना भी तुम मुझसे
मनाने जरूर आऊंगा,

मैं तुम्हारा हूँ
बस तुम्हारा ही रह जाऊंगा।

मैं तुम्हारा हूँ बस तुम्हारा ही।

Writer

Shiva rajak 
19 jan 2020
5:26 pm


Comments

Popular posts from this blog

घर से दूर ! कविता - शिवा रजक

The whole life

Hmm, acha ,theek hai . a poem by shiva rajak.